हर खर्चा वापस नहीं मिलता। कोर्ट सख्त है:
केवल वित्तीय उपाय की कार्यवाही से जुड़े खर्च ही मांग सकते हैं। इसमें वकील का समय, बैरिस्टर की फीस शामिल है।
साथ ही कोर्ट शुल्क, संपत्ति या पेंशन की मूल्यांकन रिपोर्ट शामिल हैं।
सुनवाई या बैठक के लिए उचित यात्रा किराया भी शामिल है।
बच्चों के मामले, तलाक या निजी समय के खर्च फॉर्म H में न जोड़ें।
मध्यस्थता (Mediation) को लेकर अक्सर भ्रम होता है।
यदि यह केवल वित्तीय विवाद सुलझाने के लिए था, तो खर्च जोड़ सकते हैं।
लेकिन खर्च उचित होने चाहिए।
यह जरूर जांचें कि क्या मध्यस्थता कोर्ट के आदेश पर थी या स्वैच्छिक।
रिकॉर्ड रखने का सबसे सही तरीका
विवाद और अचानक खर्चों से बचने के लिए रिकॉर्ड रखना बेहद जरूरी है।
शुरुआत से ही एक स्प्रेडशीट बनाएं।
हर इनवॉइस, रसीद और भुगतान को दर्ज करें।
इसमें कानूनी बिल, कोर्ट फीस, विशेषज्ञ इनवॉइस और यात्रा रसीदें शामिल करें।
पेशेवर मदद लेने पर हर काम का अलग बिल (itemised bills) मांगें।
इससे खर्चों को समझने और कोर्ट में साबित करने में मदद मिलेगी।
हर सुनवाई से पहले अपना फॉर्म H अपडेट करें।
यह कोई एक बार का काम नहीं है।
नियमों के अनुसार हर चरण पर खर्चों का सही अनुमान देना जरूरी है।
ऐसा न करने पर आपकी बात कमजोर हो सकती है।
हो सकता है बाद में आप खर्च वापस न पा सकें।
कम अनुमान लगाने का जोखिम
खर्चों को लेकर बहुत सकारात्मक सोचना लुभावना हो सकता है।
खासकर तब जब आप जल्दी समझौते की उम्मीद कर रहे हों।
लेकिन कम अनुमान लगाना भारी पड़ सकता है।
लोग अक्सर मध्यस्थता या विशेषज्ञ रिपोर्ट के खर्च जोड़ना भूल जाते हैं।
जज अवास्तविक बजट पर शक करते हैं।
एक व्यवस्थित और सही अनुमान हमेशा सबसे बेहतर होता है।
यदि किसी खर्च पर कोई शक हो, तो उसे नोट के साथ जोड़ लें।
कोर्ट चाहे तो खर्चा खारिज कर सकता है।
लेकिन छूटी हुई चीज को बाद में जोड़ना बहुत मुश्किल होता है।
कोस्ट्स ऑर्डर (Costs Orders): आपको खर्च कब मिल सकते हैं?
नियम 28.3 के तहत सामान्यतः दोनों पक्ष अपना-अपना खर्च खुद देते हैं।
लेकिन यदि कोई पक्ष बिना वजह देरी करे, तो कोर्ट कोस्ट्स ऑर्डर दे सकता है।
जैसे कि कोर्ट के निर्देशों का पालन न करना या समझौते से मना करना।
यदि आप इसके लिए आवेदन कर रहे हैं, तो कोर्ट फॉर्म H की बारीकी से जांच करेगा।
कोई भी गड़बड़ी आपके मामले को कमजोर कर सकती है।
यह समझना जरूरी है कि कोस्ट्स ऑर्डर अपवाद हैं, नियम नहीं।
केस जीतने पर भी आपको सारे खर्च वापस नहीं मिल सकते।
जब तक कि दूसरे पक्ष का व्यवहार बहुत ही अनुचित न रहा हो।
आम गलतियां और उनसे कैसे बचें
फॉर्म H अपडेट करना भूलना: यह एक आम गलती है। खर्च बदलते ही जल्द से जल्द नया फॉर्म H जमा करें।
रसीदें न रखना: कोर्ट खर्चों का सबूत मांग सकता है। रसीद न होने पर खर्च खारिज हो सकता है।
गलत खर्च जोड़ना: जांच लें कि फॉर्म H का हर खर्च केस से सीधा जुड़ा हो।
छोटे खर्चों को छोड़ना: छोटे यात्रा या डाक खर्च भी समय के साथ बड़े हो जाते हैं। शुरू से सब दर्ज करें।
क्या आप जानते हैं?
फॉर्म H अपडेट न करने पर आप बाद में खर्च वापस नहीं पा सकेंगे, भले ही फैसला आपके पक्ष में हो।
नियंत्रण में रहें—खर्चों को ऑटो-ट्रैक करने के लिए Caira का उपयोग करें और फॉर्म H अपडेट आसानी से बनाएं।
चिंता मुक्त होकर आत्मविश्वास से काम करें:
Caira आपकी नई दोस्त है!👱🏼♀️🌸
फैमिली, रीयल एस्टेट, क्रिमिनल, एम्प्लॉयमेंट और कमर्शियल लॉ के लिए तुरंत जवाब पाएं।
इंग्लैंड और वेल्स के 10,000 कानूनी दस्तावेजों पर आधारित।
सटीक जवाबों के लिए दस्तावेज, स्क्रीनशॉट और फोटो अपलोड करें।
1 मिनट में 14 दिनों का फ्री ट्रायल पाएं - क्रेडिट कार्ड की जरूरत नहीं।
इसके बाद वेबसाइट पर केवल £15/माह। चैट जारी रखें। https://www.unwildered.co.uk
अस्वीकरण: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। यह कानूनी सलाह नहीं है। नतीजे व्यक्तिगत परिस्थितियों के आधार पर भिन्न हो सकते हैं।
अधिक जानकारी के लिए, हमारा ET1 Form: Tips and mistakes to avoid for employment tribunals मददगार हो सकता है।
आपको शायद Form E: Common Pitfalls and How to Avoid Them भी उपयोगी लगे।
संबंधित मामलों के लिए, देखें Form H: costs estimates in family proceedings (England & Wales).
