ट्रस्ट इंग्लैंड और वेल्स में संपत्ति नियोजन का मुख्य हिस्सा हैं। ये टैक्स बचाने और संपत्ति की सुरक्षा करने में मदद करते हैं।
हालांकि, ट्रस्टों पर टैक्स के नियम बहुत जटिल हैं।
लोग अक्सर टैक्स के प्रभाव को समझे बिना ट्रस्ट बना लेते हैं। इससे अप्रत्याशित खर्च या नियम पालन की दिक्कतें हो सकती हैं।
यदि आप ट्रस्ट बनाने की सोच रहे हैं, तो इसके प्रकार, टैक्स नियमों और कमियों को समझना बेहद जरूरी है।

ट्रस्ट के प्रकार और उनके उपयोग

ट्रस्ट कई प्रकार के होते हैं। हर प्रकार की अपनी विशेषताएं और टैक्स नियम होते हैं:

  • पजेशन ट्रस्टों में रुचि: ये नामित लाभार्थी को ट्रस्ट की आय पर अधिकार देते हैं। बाद में पूंजी किसी अन्य लाभार्थी को मिल सकती है।
    इसका उपयोग अक्सर जीवनसाथी के खर्च के लिए किया जाता है, जिसके बाद शेष संपत्ति बच्चों को मिलती है।

  • विवेकाधीन ट्रस्ट (Discretionary Trusts): ट्रस्टी तय करते हैं कि लाभार्थियों को आय या पूंजी कब और कैसे बांटनी है।
    यह लचीलापन युवा या जरूरतमंद सदस्यों वाले परिवारों के लिए उपयोगी है। हालांकि, इसमें टैक्स दरें अधिक और रिपोर्टिंग कठिन होती है।

  • संचय ट्रस्ट (Accumulation Trusts): इसमें आय को बांटने के बजाय ट्रस्ट की पूंजी में जोड़ दिया जाता है।
    ये कम आम हैं, लेकिन भविष्य के लाभार्थियों के लिए संपत्ति बनाने में उपयोगी हो सकते हैं।

  • बेयर ट्रस्ट (Bare Trusts): लाभार्थी का ट्रस्ट की संपत्ति और आय पर पूरा अधिकार होता है।
    टैक्स के लिए संपत्ति को लाभार्थी की ही माना जाता है। यह बच्चों या युवा वयस्कों के लिए फायदेमंद हो सकता है।

ट्रस्ट के प्रकारों को लेकर अक्सर उलझन होती है, खासकर जब पारिवारिक स्थितियां बदलती हैं।
यदि ट्रस्टी खास तरीके से काम करते हैं, तो विवेकाधीन ट्रस्ट को पजेशन ट्रस्ट की तरह माना जा सकता है।
इसलिए ट्रस्ट डीड और फैसलों को स्पष्ट और अपडेट रखना जरूरी है.

विरासत कर: प्रासंगिक संपत्ति व्यवस्था और इसके नुकसान

ज्यादातर ट्रस्ट (बेयर ट्रस्ट और विकलांगों या अनाथों के ट्रस्टों को छोड़कर) विरासत कर (IHT) के तहत आते हैं। इस व्यवस्था में कई शुल्क लगते हैं:

  • प्रवेश शुल्क (Entry Charge): जीवनकाल में संपत्ति ट्रस्ट में ट्रांसफर करने पर, शून्य दर सीमा (अभी £325,000) से अधिक पर 20% टैक्स लग सकता है।
    लोग अक्सर इसे अनदेखा कर देते हैं और सोचते हैं कि ट्रस्ट में उपहार हमेशा टैक्स-फ्री होते हैं।

  • दस-वर्षीय शुल्क (Periodic Charge): हर दस साल में, शून्य दर सीमा से अधिक की संपत्ति के मूल्य पर 6% तक का शुल्क लग सकता है।
    नियोजन न होने पर यह समय के साथ ट्रस्ट की संपत्ति को कम कर सकता है।

  • निकास शुल्क (Exit Charge): जब संपत्ति ट्रस्ट से बाहर जाती है (जैसे लाभार्थी को मिलने पर), तो आनुपातिक IHT शुल्क लग सकता है।

इन शुल्कों के प्रभाव को कम आंकना आसान है, खासकर यदि संपत्ति का मूल्य बढ़ रहा हो।
अचानक आने वाले टैक्स बिलों से बचने के लिए नियमित मूल्यांकन और रिकॉर्ड रखना जरूरी है।

आयकर: दरें, वितरण और लाभार्थियों पर प्रभाव

ट्रस्टों पर आयकर की दरें उनके प्रकार पर निर्भर करती हैं:

  • विवेकाधीन ट्रस्ट: आय पर "ट्रस्ट दर" (अभी अधिकतर आय पर 45%, लाभांश पर 39.35%) से टैक्स लगता है।
    यह व्यक्तिगत दरों से अधिक है। ट्रस्टियों को लाभार्थियों को टैक्स वाउचर देने होते हैं ताकि वे रिफंड ले सकें, पर यह काम झंझट भरा हो सकता है।

  • पजेशन ट्रस्टों में रुचि: लाभार्थी पर वैसे ही टैक्स लगता है जैसे आय सीधे मिली हो।
    हालांकि, ट्रस्टियों को भुगतान से पहले बुनियादी दर पर टैक्स काटना पड़ सकता है।

  • बेयर ट्रस्ट: आय पर वैसे टैक्स लगता है जैसे वह लाभार्थी की हो।
    यह कम आय वाले नाबालिगों के लिए टैक्स बचाने का अच्छा तरीका हो सकता है।

लाभार्थी की खुद की टैक्स स्थिति पर ध्यान न देना एक आम गलती है।
यदि लाभार्थी टैक्स नहीं चुकाता, तो वे ट्रस्ट द्वारा दिए गए टैक्स का रिफंड ले सकते हैं, बशर्ते सही कागजी कार्रवाई पूरी हो।

पूंजीगत लाभ कर (CGT): छूट और मुश्किलें

ट्रस्टों को पूंजीगत लाभ पर 20% (या आवासीय संपत्ति पर 24%) टैक्स देना होता है। इनकी वार्षिक छूट सीमा व्यक्तियों से कम होती है:

  • होल्डओवर रिलीफ: ट्रस्ट में संपत्ति ट्रांसफर करने या निकालने पर लाभ कर स्थगित किया जा सकता है।
    पर यह सही चुनाव करने पर ही होता है। समय-सीमा चूकना एक बड़ी और महंगी गलती है।

  • व्यावसायिक संपत्ति निपटान राहत: यह कठिन शर्तों को पूरा करने पर व्यावसायिक संपत्तियों पर CGT को कम कर सकती है।

  • मुख्य निजी निवास राहत: यह ट्रस्ट की आवासीय संपत्ति पर लागू हो सकती है, बशर्ते लाभार्थी वहां मुख्य घर के रूप में रहता हो।
    इसके नियम कड़े हैं और अक्सर लोग इन्हें गलत समझ लेते हैं।

नियोजन रणनीतियां और नियमित समीक्षा

सफल ट्रस्ट नियोजन में अक्सर ये शामिल होते हैं:

  • जीवनकाल के ट्रांसफर के लिए शून्य दर सीमा का पूरा उपयोग करना।

  • फैमिली इन्वेस्टमेंट कंपनियों जैसे विकल्पों पर विचार करना, जो अधिक लचीलापन और कम टैक्स दरें दे सकती हैं।

  • आयकर को टालने या कम करने के लिए ट्रस्ट के भीतर बीमा बॉन्ड का उपयोग करना।

  • विदेशी ट्रस्टों के लाभ और जोखिमों को तोलना, जिनके यूके निवासियों के लिए कड़े और जटिल नियम हैं।

ट्रस्ट के नियम अक्सर बदलते हैं और HMRC का रुख कड़ा हो सकता है।
ट्रस्ट व्यवस्था को सही रखने के लिए नियमित समीक्षा जरूरी है।
बदलावों के साथ न चलने से बड़े टैक्स बिल या पेनाल्टी लग सकती है।

अंतिम विचार

ट्रस्ट बेहतरीन साधन हैं, पर इनके टैक्स नियम बहुत उलझे हुए हैं।
नियमों को समझें, स्पष्ट रिकॉर्ड रखें और गलतियों से बचने के लिए व्यवस्था की नियमित समीक्षा करें।

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डिस्क्लेमर: यह ब्लॉग केवल सामान्य जानकारी के लिए है। यह कानूनी सलाह नहीं है। व्यक्तिगत परिस्थितियों के आधार पर परिणाम बदल सकते हैं।

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