निष्पादक या प्रशासक बनना एक बड़ी जिम्मेदारी है।
आप सिर्फ संपत्ति नहीं बांटते।
वसीयत बांटने से पहले सारे कर्ज चुकाने के लिए आप खुद जिम्मेदार होते हैं।
लेनदार छूटने पर आप खुद उत्तरदायी होंगे।
इसके लिए ट्रस्टी एक्ट 1925 की धारा 27 काम आती है।
इसकी प्रक्रिया अपनाकर आप खुद को सुरक्षित रख सकते हैं।
धारा 27 का नोटिस क्या है और यह क्यों जरूरी है?
धारा 27 का नोटिस एक सार्वजनिक घोषणा है।
यह लेनदारों को एक तय समय में दावा पेश करने का मौका देता है।
नोटिस देकर अवधि पूरी होने का इंतजार करने से आपको सुरक्षा मिलती है।
समय पर दावा न करने वाले लेनदार आप पर कार्रवाई का अधिकार खो सकते हैं।
आइए इसे विस्तार से समझते हैं:
सार्वजनिक नोटिस: आप द गजट और स्थानीय अखबारों में विज्ञापन देते हैं।
यह मृतक के रहने या संपत्ति वाले क्षेत्र में दिया जाता है।
इसमें मृतक का विवरण और दावा भेजने का पता शामिल होता.अंतिम तिथि: आप दावा करने के लिए एक तारीख तय करते हैं।
आमतौर पर यह विज्ञापन से दो महीने बाद की होती है।सुरक्षा, दायित्व से मुक्ति नहीं: तय समय के बाद भी लेनदार बची हुई संपत्ति से दावा कर सकते हैं।
या वे लाभार्थियों से दावा कर सकते हैं।
लेकिन नियम मानने पर आप व्यक्तिगत देनदारी से सुरक्षित रहते हैं।
धारा 27 का नोटिस कैसे और कहां प्रकाशित करें
यह प्रक्रिया बहुत आसान है, लेकिन सावधानी जरूरी है:
द गजट (The Gazette): कानूनी नोटिस के लिए यह आधिकारिक जगह है।
उनकी वेबसाइट पर जाकर मृतक की जानकारी दर्ज करें।
दावे के लिए पता दें और तय शुल्क का भुगतान करें।स्थानीय समाचार पत्र: ऐसा अखबार चुनें जो उस इलाके में पढ़ा जाता हो।
जहां मृतक रहते थे।
इससे उन स्थानीय लेनदारों तक सूचना पहुंचेगी जो गजट नहीं पढ़ते।नोटिस की अवधि: दो महीने का समय मानक स्तर का माना जाता है।
सुनिश्चित करें कि समय सीमा स्पष्ट हो और पर्याप्त समय मिले।
निष्पादकों और प्रशासकों के लिए सबसे अच्छे तरीके
नोटिस की अवधि समाप्त होने का इंतजार करें: संपत्ति बांटने में जल्दबाजी न करें।
समय सीमा खत्म होने तक प्रतीक्षा करें।
इससे लेनदारों को पूरा मौका मिलता है।रिकॉर्ड सुरक्षित रखें: प्रकाशित नोटिस और उसके प्रमाण की कॉपी संभालकर रखें।
इन्हें संपत्ति के दस्तावेजों के साथ फाइल करें।
विवाद होने पर ये सबूत का काम करेंगे।आपातकालीन फंड बनाकर रखें: समय सीमा के बाद भी कुछ पैसे बचाकर रखें।
यह आखिरी बिलों या टैक्स के लिए काम आएगा।
यह आपकी समझदारी दिखाता है और लाभार्थियों को सुरक्षित रखता है।
उदाहरण से समझें
मान लीजिए आप अपनी आंटी की संपत्ति के निष्पादक हैं।
वे दो अलग शहरों में रहीं और व्यापार चलाती थीं।
आपने गजट और दोनों स्थानीय अखबारों में धारा 27 का नोटिस दिया।
दो महीने तक कोई दावा नहीं आया।
आपने संपत्ति बांट दी और कुछ राशि आपात बिलों के लिए रख ली।
कुछ हफ्ते बाद एक क्रेडिट कार्ड कंपनी ने पुराने कर्ज के लिए संपर्क किया।
धारा 27 का पालन करने के कारण आप व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी नहीं हैं।
यह कर्ज सिर्फ बची हुई राशि या लाभार्थियों से ही दिया जा सकता है।
आपने नियम का पालन किया और आपकी निजी संपत्ति पूरी तरह सुरक्षित है।
धारा 27 का नोटिस क्यों जरूरी है?
यह खुद को सुरक्षित रखने का एक आसान और किफायती तरीका है।
यह विशेष रूप से तब जरूरी है जब मृतक के पास:
कई पते रहे हों या वे अक्सर जगह बदलते रहे हों
स्वरोजगार या कोई व्यावसायिक हित रहा हो
जटिल वित्तीय स्थिति हो, जैसे कई बैंक खाते या क्रेडिट कार्ड
साधारण मामलों में भी नोटिस देना एक अच्छी आदत है।
यह दर्शाता है कि आप जिम्मेदारी से काम कर रहे हैं।
इससे सभी को दावा करने का उचित अवसर मिलता है।
मुख्य निष्कर्ष
यदि आप निष्पादक या प्रशासक हैं, तो धारा 27 के नोटिस को न छोड़ें।
यह कम लागत में आपको बड़ी देनदारी और भविष्य की दिक्कतों से बचाता है।
गजट और स्थानीय अखबार में विज्ञापन दें।
अवधि पूरी होने का इंतजार करें, रिकॉर्ड रखें और कुछ राशि सुरक्षित रखें।
आप खुद को, संपत्ति को और लाभार्थियों को सुरक्षित रख पाएंगे।
अस्वीकरण: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है।
यह कानूनी, वित्तीय या टैक्स सलाह नहीं है।
हर मामला अलग होता है और परिणाम आपकी परिस्थितियों पर निर्भर करते हैं।
नियमों को समझने के लिए समय लें और अपने दस्तावेज तैयार रखें।
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