कोशिश करें: क्या आप कोर्ट में गैसलाइटिंग साबित कर सकते हैं?

गैसलाइटिंग एक मानसिक शोषण है। इसमें कोई आपको आपकी ही सूझबूझ पर शक करने पर मजबूर करता है। इंग्लैंड और वेल्स में यह कानूनी शब्द नहीं है। फिर भी कोर्ट इसे मानसिक क्रूरता मानता है। यह दमनकारी और नियंत्रणकारी व्यवहार में आता है। नॉन-मोलेस्टेशन ऑर्डर (फॉर्म FL401) के लिए, आपको इसे कानूनी दायरे में साबित करना होगा।

1. कानूनी दायरे में गैसलाइटिंग

फैमिली प्रोसीजर रूल्स (PD12J) और सीरियस क्राइम एक्ट 2015 इसे डराने और दबाने वाला व्यवहार मानते हैं। जब कोई आपके आत्मविश्वास को बार-बार तोड़े, तो यह गैसलाइटिंग है। वह आपके मानसिक स्वास्थ्य पर झूठी बातें फैलाता है। अपनी बात रखते समय, "भावनात्मक शोषण" या "दमनकारी नियंत्रण" जैसे शब्दों का प्रयोग करें। अपने सबूतों को इन परिभाषाओं से जोड़ें।

2. गैसलाइटिंग का आप पर असर

गैसलाइटिंग का शिकार व्यक्ति हमेशा भ्रम और चिंता में रहता है। वह खुद पर शक करता है। आप बिना गलती के भी माफी मांगने लगते हैं। आप अपनों से दूर होने लगते हैं। समय के साथ, इससे अवसाद और कम आत्मविश्वास की समस्या होती है। रोजमर्रा के काम बोझ लगने लगते हैं। आप काम या लोगों से कतराने लगते हैं। इसका असर आपके पालन-पोषण और काम पर पड़ सकता है।

3. गैसलाइटिंग साबित करने के तरीके

मजबूत केस के लिए व्यवहार के पैटर्न और उसके असर पर सबूत जुटाएं:

  • डायरी लिखें: सभी घटनाओं, तारीखों और अपने अनुभवों को तारीख के साथ दर्ज करें।

  • मैसेज संभालें: उन मैसेज, ईमेल या कॉल रिकॉर्डिंग को सुरक्षित रखें जो आपको गलत ठहराते हैं।

  • झूठे आरोपों को दर्ज करें: दूसरों या अधिकारियों से आपके बारे में बोली गई झूठी बातों के सबूत रखें।

  • मदद लें: अपने डॉक्टर या थेरेपिस्ट से अपनी मानसिक स्थिति पर रिपोर्ट लें।

  • गवाहों के बयान: इस व्यवहार को देखने वाले दोस्तों या परिवार के बयान अहम हो सकते हैं।

बयान देते समय हर बात साफ और स्पष्ट रखें। बताएं कि इसका आप पर क्या असर हुआ। अपने दावों को कानून (PD12J और सीरियस क्राइम एक्ट) के तहत परिभाषित करें।

4. कोर्ट किन बातों पर ध्यान देगा

कोर्ट केवल एक घटना नहीं, बल्कि पूरे व्यवहार के तरीकों को देखेगा। वह आपके मानसिक स्वास्थ्य और आत्मविश्वास पर पड़े असर को परखेगा। अगर आरोपी ने अपने पद का इस्तेमाल आपको दबाने के लिए किया है, तो इसे जरूर बताएं। पेशेवरों द्वारा आपकी मानसिक स्थिति को ठीक बताना आपके पक्ष को मजबूत करेगा।





फैसला [2022] EWHC 108 (Fam)

इस फैसले में हाई कोर्ट ने गैसलाइटिंग की पहचान करने का एक स्पष्ट उदाहरण दिया। कोर्ट ने इसे दमनकारी व्यवहार माना। जज ने पाया कि पिता ने बिना किसी मेडिकल सबूत के मां को मानसिक बीमार बताया था। इसे "गंभीर मानसिक शोषण" और "गैसलाइटिंग" माना गया। यह मां के आत्मविश्वास को तोड़ने की सोची-समझी कोशिश थी।

आपके केस के लिए इस फैसले की मुख्य बातें:

  • पैटर्न और इरादा: कोर्ट ने लगातार किए गए व्यवहार को देखा। पिता द्वारा मां के मानसिक स्वास्थ्य पर झूठे दावे करना नियंत्रण की कोशिश थी।




  • रूतबे का गलत इस्तेमाल: पिता एक मेंटल हेल्थ नर्स था। उसके रूतबे के कारण उसके झूठे दावों को लोगों ने सच मान लिया, जिससे नुकसान ज्यादा हुआ।





  • पीड़ित पर असर: कोर्ट ने मां के मानसिक तनाव और खोए हुए आत्मविश्वास की बात को गंभीरता से लिया।





  • कानूनी पहलू: भले ही गैसलाइटिंग कानूनी शब्द नहीं है, कोर्ट ने इस शब्द को सही माना। इस व्यवहार को दमनकारी नियंत्रण के तहत आंका गया।

काम की बात:
अगर आप गैसलाइटिंग का आरोप लगा रहे हैं, तो झूठे बयानों के सुबूत पेश करें। खासकर जो दूसरों के सामने दिए गए हों। अपने मानसिक तनाव को खुलकर बताएं। इसे दमनकारी और नियंत्रणकारी कानून से जोड़ें। कोर्ट आपके मानसिक स्वास्थ्य पर पड़े असर को देखेगा।

अस्वीकरण: यह लेख कानूनी सलाह नहीं है। कोर्ट का फैसला सबूतों के आधार पर तय होता है।


अधिक जानकारी के लिए, हमारा गाइड Facing False Allegations in Family Court देखें।

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