पेंशन अक्सर संपत्ति का एक बड़ा हिस्सा होती है। हालांकि, लोग नहीं जानते कि मृत्यु के बाद उनकी बचत का क्या होता है। इसके नियम उलझे हुए हो सकते हैं।
अलग-अलग पेंशन में मृत्यु लाभ और टैक्स नियम भिन्न होते हैं। अपनी प्राथमिकताओं को समझना और योजना बनाना अपनों के काम आता है।

पेंशन के प्रकार और मृत्यु लाभ

पेंशन के मुख्य रूप से ये तीन प्रकार होते हैं:

  • डिफाइंड बेनिफिट (अंतिम वेतन) पेंशन: यह आमतौर पर मृत्यु के बाद जीवनसाथी के लिए पेंशन देती है।
    रिटायरमेंट के बाद तय समय सीमा में मृत्यु होने पर एकमुश्त राशि भी मिलती है।
    योजना के अनुसार लाभ अलग हो सकते हैं। अविवाहित साथी भी योग्य हो सकते हैं, पर गारंटी नहीं है।

  • डिफाइंड कॉन्ट्रिब्यूशन पेंशन (SIPP और निजी पेंशन सहित): यह अधिक लचीली होती है।
    मृत्यु पर बची राशि एकमुश्त मिल सकती है, लाभार्थियों की आय बन सकती है, या उनके निवेश में रह सकती है।
    आप परिवार के बाहर भी किसी को लाभार्थी बना सकते हैं।

  • राज्य पेंशन: इसमें सीमित मृत्यु लाभ मिलता है। यह मुख्यतः जीवनसाथी के लिए होता है।
    अन्य लाभार्थियों के लिए कोई एकमुश्त राशि या चालू पेंशन नहीं मिलती है।

विरासत कर और पेंशन

पेंशन का सबसे बड़ा फायदा यह है कि अधिकांश पेंशन मृत्यु लाभ विरासत कर (IHT) के दायरे में नहीं आते हैं।
इसका मतलब है कि आपकी पेंशन बिना किसी विरासत कर के आगे सौंपी जा सकती है, जो घर या बचत पर नहीं होता।

  • यदि मृत्यु 75 वर्ष की आयु से पहले हो: अधिकांश डिफाइंड कॉन्ट्रिब्यूशन पेंशन लाभ लाभार्थियों को टैक्स-फ्री मिलते हैं।

  • यदि मृत्यु 75 वर्ष की आयु के बाद हो: लाभार्थियों को निकाली गई राशि पर अपने दर के अनुसार आयकर देना होगा।

डिफाइंड बेनिफिट पेंशन से एकमुश्त राशि मिल सकती है। सीधे लाभार्थी के बजाय संपत्ति में जाने पर इस पर कर लग सकता है।

नामांकन फॉर्म का महत्व

पेंशन प्रदाता आपसे नामांकन फॉर्म भरवाते हैं। इसमें आप अपनी इच्छा से लाभार्थी चुनते हैं।
यह कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है, फिर भी ट्रस्टी इसी के अनुसार निर्णय लेते हैं।
यदि आप नामांकन नहीं करते हैं, तो लाभ गलत व्यक्ति को मिल सकता है।

नियोजन रणनीतियां

  • नामांकन फॉर्म हमेशा अपडेट रखें: शादी, तलाक या बच्चे के जन्म जैसी घटनाओं के बाद इसे बदलें।

  • ट्रस्ट प्लानिंग पर विचार करें: पारिवारिक स्थिति जटिल होने पर ट्रस्ट को नामांकित करें। इससे बेहतर नियंत्रण मिलता है।

  • लचीले निकासी विकल्प: कई आधुनिक पेंशन लाभार्थियों को जरूरत के हिसाब से पैसे निकालने की सुविधा देती हैं।

  • एनुटी सुरक्षा: यह जांचें कि खरीदी गई एनुटी में गारंटी अवधि या मूल्य सुरक्षा शामिल है या नहीं।

मुख्य बातें और गलतियां

  • ट्रस्टियों का विवेक: ट्रस्टी आपके नामांकन के लिए बाध्य नहीं हैं, पर निर्देश स्पष्ट होने से सहायता मिलती है।

  • टैक्स के नियम: 75 वर्ष के बाद मृत्यु पर लाभार्थियों को टैक्स देना होगा, जिससे निवेश प्रभावित हो सकता है।

  • सौतेले परिवार: यदि आपने दोबारा शादी की है, तो सुनिश्चित करें कि आपका नामांकन सही इच्छा दर्शाता हो।

  • खोई हुई पेंशन: अपनी सभी पेंशन योजनाओं का रिकॉर्ड रखें और परिवार को इसकी जानकारी दें।

अंतिम विचार

पेंशन मृत्यु लाभ योजना का अहम हिस्सा हैं, बशर्ते आप समय पर नामांकन करें।
सही नियोजन से आपकी बचत आपके पसंदीदा लोगों को सबसे सुरक्षित और कर-कुशल तरीके से मिलेगी।

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