परफॉर्मेंस इम्प्रूवमेंट प्लान (PIP) नियोक्ताओं के लिए काम का दस्तावेज है।
सही से करने पर यह कर्मचारी को सुधार का मौका देता है।
विवाद बढ़ने पर यह निष्पक्ष प्रक्रिया का सबूत भी देता है।
गलत तरीके से करने पर अनुचित बर्खास्तगी के दावे हो सकते हैं।
यह चेकलिस्ट कानून और ACAS गाइडलाइंस के जरूरी नियम बताती है।
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परफॉर्मेंस इम्प्रूवमेंट प्लान क्या है?
यह कर्मचारी की क्षमता या काम की कमी पर एक औपचारिक दस्तावेज है। इसमें सुधरने के लक्ष्य, समीक्षा का समय और नियोक्ता की तरफ से मिलने वाली मदद लिखी होती है।
Employment Rights Act 1996 की धारा 98(2)(a) के तहत क्षमता बर्खास्तगी का सही आधार है। एक सही PIP इस निष्पक्ष प्रक्रिया का सबूत बनता है।
ACAS संहिता कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है, पर ट्रिब्यूनल इस पर ध्यान देते हैं। संहिता का पालन न करने पर कोर्ट मुआवजे को 25% तक बढ़ा सकता है।
परफॉर्मेंस इम्प्रूवमेंट प्लान कब इस्तेमाल करें?
ACAS के अनुसार औपचारिक PIP से पहले अनौपचारिक सुधार की कोशिश होनी चाहिए। नियोक्ता कोचिंग, ट्रेनिंग या फीडबैक देकर सुधार का प्रयास पहले अवश्य करें।।
PIP शुरू करने के मुख्य कारण:
काम की गुणवत्ता तय मानकों से लगातार नीचे जा रही हो।
बिना ठोस वजह के काम समय पर पूरा न हो रहा हो।
चर्चा के बाद भी स्किल की कमी दूर न हुई हो।
ऐसी गलतियां जिससे ग्राहकों या कंपनी को नुकसान पहुंचे।
PIP शुरू करने से पहले जांचें कि मामला क्षमता का है या आचरण का। क्षमता के लिए क्षमता प्रक्रिया और आचरण के लिए अनुशासनात्मक प्रक्रिया चुनें।
PIP बनाम अनुशासनात्मक कार्रवाई: क्या अंतर है?
कारक | परफॉर्मेंस इम्प्रूवमेंट प्लान (क्षमता) | अनुशासनात्मक प्रक्रिया (आचरण) |
|---|---|---|
चिंता का कारण | कर्मचारी आवश्यक मानकों को पूरा करने में असमर्थ है | कर्मचारी नियमों को नहीं मान रहा या अनुचित व्यवहार कर रहा है |
उद्देश्य | प्रदर्शन में सुधार और सहायता | गलत व्यवहार पर कार्रवाई करना |
टोन | मददगार, जिसमें ट्रेनिंग एवं संसाधन शामिल हैं | जांच आधारित और सुधारात्मक |
लक्ष्य पूरे न होने पर परिणाम | निष्पक्ष प्रक्रिया के बाद क्षमता आधारित बर्खास्तगी | कार्रवाई जिसमें नौकरी से निकालना भी शामिल है |
संबंधित कानून | ERA 1996 s.98(2)(a) — क्षमता | ERA 1996 s.98(2)(b) — आचरण |
दोनों को आपस में मिलाना गलत है। क्षमता के मामले में आचरण वाली कार्रवाई करने से ट्रिब्यूनल में नियोक्ता का पक्ष कमजोर हो जाता है।
एक सही परफॉर्मेंस इम्प्रूवमेंट प्लान में क्या होना चाहिए?
ACAS और ट्रिब्यूनल के अनुसार एक सही PIP में निम्नलिखित बातें होनी जरूरी हैं:
स्पष्ट चिंताएं: उदाहरण और तारीखों के साथ कमियों को दर्ज करें। "प्रदर्शन सुधारें" जैसी अस्पष्ट बातें न लिखें।
SMART लक्ष्य: हर लक्ष्य विशिष्ट, मापने योग्य, प्राप्य, वास्तविक और समयबद्ध हो।
संसाधन और मदद: नियोक्ता स्पष्ट करे कि वह ट्रेनिंग या वर्कलोड कम करके क्या मदद देगा।
समीक्षा की समय-सीमा: शुरू होने की तारीख, बीच की समीक्षा बैठकें और समाप्ति की तारीख तय हो।
परिणाम: स्पष्ट रूप से बताएं कि लक्ष्य पूरे न होने पर बर्खास्तगी जैसी कार्रवाई हो सकती है।
साथी लाने का अधिकार: ERA 1999 की धारा 10 के तहत बैठक में यूनियन प्रतिनिधि या साथी को साथ लाने का अधिकार है।
अपील का अधिकार: प्रक्रिया समाप्त होने पर हर अंतिम फैसले के खिलाफ लिखित अपील का अधिकार दें।
PIP में SMART लक्ष्य: व्यावहारिक अर्थ
SMART केवल एक फ्रेमवर्क नहीं है। ट्रिब्यूनल में बर्खास्तगी के सही होने का फैसला इसी पर निर्भर करता है। अस्पष्ट लक्ष्य बर्खास्तगी को गलत साबित कर सकते हैं।
SMART तत्व | PIP में इसका अर्थ | कमजोर बनाम SMART लक्ष्य |
|---|---|---|
विशिष्ट (Specific) | स्पष्ट दिखाता है कि कर्मचारी को क्या काम करना है | कमजोर: "बातचीत सुधारें।" SMART: "हर शुक्रवार दोपहर तक वीकली स्टेटस रिपोर्ट सबमिट करें।" |
मापने योग्य (Measurable) | प्रगति को बिना किसी पक्षपात के मापा जा सके | कमजोर: "पहल दिखाएं।" SMART: "हर महीने एक सुधार प्रक्रिया का प्रस्ताव दें।" |
प्राप्य (Achievable) | मानक ऐसा हो जिसे कर्मचारी हासिल कर सके | दूसरों से 40% अधिक काम का लक्ष्य देना गलत है। |
वास्तविक (Realistic) | यह लक्ष्य कर्मचारी की भूमिका के अनुकूल हो | बिना ट्रेनिंग के कोई नया काम सौंपना अवास्तविक है। |
समयबद्ध (Time-bound) | हर लक्ष्य के लिए एक समय-सीमा तय हो | कमजोर: "PIP के अंत तक सुधारें।" SMART: "छठे हफ्ते तक X और 12वें हफ्ते तक Y पूरा करें।" |
परफॉर्मेंस इम्प्रूवमेंट प्लान कितने समय का होना चाहिए?
इसकी कोई कानूनी अवधि नहीं है। ACAS गाइडलाइंस मानती हैं कि समय-सीमा तार्किक होनी चाहिए। मुख्य कारक हैं:
काम की जटिलता और प्रदर्शन की चिंता का प्रकार।
सुधार दिखाने के लिए आवश्यक वास्तविक समय।
ट्रेनिंग या नए संसाधनों को उपलब्ध कराने का समय।
एक सामान्य गाइडलाइन:
परिदृश्य | तार्किक समय-सीमा |
|---|---|
जूनियर स्तर के सीधे और सरल कार्य | 4 से 6 हफ्ते |
जटिल काम या स्किल डेवलपमेंट से जुड़े कार्य | 8 to 12 हफ्ते |
सीनियर या स्पेशलिस्ट रोल | 3 से 6 महीने |
ट्रिब्यूनल देखेगा कि कर्मचारी को सुधरने का मौका मिला या नहीं। सीनियर मैनेजर को सिर्फ दो हफ्ते का PIP देना गलत माना जाएगा।
क्या PIP में जॉब डिस्क्रिप्शन से बाहर का काम दे सकते हैं?
यह अक्सर होने वाली बड़ी गलती है। PIP केवल जॉब डिस्क्रिप्शन और अनुबंध में तय काम के लिए ही होना चाहिए।
लचीलेपन की शर्तों को कोर्ट सीमित दायरे में देखता है। यह नियोक्ता को वर्तमान स्तर के कार्य देने की छूट देता है, उसका मूल पद बदलने की नहीं।
जॉब डिस्क्रिप्शन से बाहर के लक्ष्य देने के नुकसान:
कर्मचारी लक्ष्य का विरोध कर सकता है, जिससे सुधार प्रक्रिया कमजोर होगी।
बाहरी काम के आधार पर बर्खास्तगी को ट्रिब्यूनल गलत मान सकता है।
जबरन नया पद सौंपने पर कर्मचारी कंस्ट्रक्टिव डिस्मिसल का दावा कर सकता है।
PIP फाइनल करने से पहले जॉब डिस्क्रिप्शन जांचें। यदि काम बदल चुका है, तो पहले सलाह करके जॉब डिस्क्रिप्शन अपडेट करें।
PIP और विकलांगता: समानता अधिनियम की जरूरतें
Equality Act 2010 के तहत नियोक्ताओं को विकलांग कर्मचारियों के लिए उचित बदलाव करने चाहिए। 12 महीने या अधिक रहने वाली शारीरिक/मानसिक समस्या विकलांगता में आती है।
PIP के दौरान उचित बदलाव करने की जिम्मेदारी लागू होती है। इसके तहत नियोक्ता को ये कदम उठाने होंगे:
चेक करें कि काम की कमी का संबंध विकलांगता से तो नहीं है।
कर्मचारी का ऑक्यूपेशनल हेल्थ असेसमेंट जरूर करवाएं।
लक्ष्य, समय-सीमा या जरूरी मदद में बदलावों पर विचार करें।
किए गए सभी बदलावों को लिखित रूप में नोट करें।
बदलाव न करने पर विकलांगता भेदभाव का केस बन सकता है। इसके लिए मुआवजे की सीमा तय नहीं है, जबकि सामान्य बर्खास्तगी में यह अधिकतम £115,115 या एक साल का वेतन है।
नियोक्ता को यदि फिट नोट या बातचीत से विकलांगता की जानकारी थी, तो वह अनजान नहीं बन सकता। संदेह होने पर ऑक्यूपेशनल हेल्थ की सलाह अवश्य लें।
PIP फेल होने पर क्या होता है?
PIP पीरियड समाप्त होने पर औपचारिक समीक्षा बैठक करें। कर्मचारी को साथी लाने का हक है। निष्पक्ष रूप से सभी गवाहियों को जांचें।
संभावित परिणाम:
लक्ष्य पूरे होने पर प्लान लिखित सहमति देकर समाप्त करें।
आंशिक सुधार होने पर स्पष्ट लक्ष्यों के साथ अवधि कुछ समय बढ़ाएं।
लक्ष्य पूरे न होने पर अगर वजह नियोक्ता की ओर से मदद की कमी नहीं है, तो क्षमता सुनवाई की ओर बढ़ें।
सुनवाई में कर्मचारी को प्रतिनिधि लाने और जवाब देने का अधिकार है। प्रक्रिया निष्पक्ष होनी चाहिए।
कर्मचारी को अपील का अधिकार लिखित में दें। अपील की सुनवाई किसी नए बोर्ड से कराएं।
बर्खास्तगी से पहले यह भी देखें कि क्या कंपनी में कोई अन्य उपयुक्त पद खाली है। ट्रिब्यूनल इस बारे में पूछताछ करता है।
क्या PIP का नतीजा हमेशा नौकरी से निकाला जाना होता है?
ऐसा जरूरी नहीं है। PIP को केवल कागजी कार्रवाई के रूप में इस्तेमाल करने वाले नियोक्ताओं को कानूनी जोखिम उठाना पड़ सकता है।
ट्रिब्यूनल दिखावटी PIP को आसानी से पहचान लेते हैं। पहले से तय फैसले के कुछ संकेत ये हैं:
मातृत्व अवकाश या शिकायत दर्ज कराने के तुरंत बाद PIP जारी करना।
ऐसे लक्ष्य देना जिन्हें तय समय में पूरा करना असंभव हो।
प्लान में वादा की गई मदद कभी उपलब्ध न कराना।
समीक्षा बैठकों में सुधार के प्रमाणों पर ध्यान न देना।
बिना पूरी सुनवाई किए पहले से ही बर्खास्तगी का मन बना लेना।
दिखावटी साबित होने पर ट्रिब्यूनल मुआवजा तय करेगा। ACAS नियम न मानने पर हर्जाना 25% तक बढ़ सकता है।
क्या PIP से अनुचित बर्खास्तगी का मुकदमा बन सकता है?
हां। यदि PIP में ACAS कोड और निष्पक्षता का ध्यान नहीं रखा गया, तो मुकदमा चलाया जा सकता है।
वर्तमान में इस दावे के लिए दो साल की नौकरी जरूरी है। Employment Rights Act 2025 के तहत यह सीमा 1 जनवरी 2027 से घटकर छह महीने हो जाएगी।
मुकदमे में जीत के लिए नियोक्ता को यह सिद्ध करना होगा:
बर्खास्तगी का सही कारण था (क्षमता ERA 1996 s.98(2)(a))।
वे सच में मानते थे कि कर्मचारी का काम मानकों से नीचे था।
जांच के बाद उचित आधार पर इस नतीजे पर पहुंचा गया था।
प्रक्रिया निष्पक्ष थी - इसमें उचित मदद, SMART लक्ष्य, अपील का अधिकार शामिल थे।
बर्खास्तगी का फैसला बिल्कुल उचित और आखिरी रास्ता था।
नियोक्ता द्वारा की जाने वाली सामान्य गलतियां
गलती | जोखिम | बेहतर तरीका |
|---|---|---|
बिना अनौपचारिक फीडबैक दिए ही PIP सौंपना | ट्रिब्यूनल प्रक्रिया को जल्दबाजी में की गई और अनुचित मान सकता है | पहले बातचीत, अनौपचारिक कोचिंग और ट्रेनिंग के प्रयास दर्ज करें |
"व्यवहार सुधारें" जैसे अस्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करना | ट्रिब्यूनल मान सकता है कि लक्ष्य SMART नहीं थे, जिससे बर्खास्तगी गलत होगी | स्पष्ट, मापने योग्य लक्ष्यों का चयन करें |
जॉब डिस्क्रिप्शन के बाहर का काम सौंपना | कर्मचारी काम से इनकार कर सकता है; बर्खास्तगी अनुचित होगी | PIP देने से पहले हर लक्ष्य को कॉन्ट्रैक्ट के साथ जरूर जांचें |
कोई मदद न देना | निष्पक्षता खत्म होती है; कंस्ट्रक्टिव डिस्मिसल का आधार बन सकता है | तय ट्रेनिंग, मेंटरशिप या संसाधन दें |
अवास्तविक समय-सीमा तय करना | ट्रिब्यूनल मानेगा कि सुधरने का सही अवसर नहीं मिला | रोल और समस्या के अनुसार ही समय तय करें |
स्वास्थ्य या विकलांगता पर ध्यान न देना | विकलांगता भेदभाव का दावा, असीमित मुआवजा | ऑक्यूपेशनल हेल्थ की सलाह लें; बदलावों को लिखित में रिकॉर्ड करें |
अपील का अधिकार न देना | ACAS कोड का उल्लंघन; मुआवजे में 25% की बढ़ोतरी | हर औपचारिक फैसले के चरण में लिखित रूप से अपील का अधिकार अवश्य दें |
पहले ही नतीजा तय कर लेना | दिखावटी PIP; अनुचित बर्खास्तगी का मुकदमा दर्ज हो सकता है | प्रक्रिया को निष्पक्ष सुधार के नजरिए से चलाएं |
स्रोत
Employment Rights Act 1996, section 98 - क्षमता बर्खास्तगी का सही आधार।
Employment Relations Act 1999, section 10 - प्रतिनिधि लाने का अधिकार।
Equality Act 2010, sections 20 and 21 - उचित बदलाव करने का कर्तव्य।
Equality Act 2010, section 6 - विकलांगता की परिभाषा।
ACAS कोड ऑफ प्रैक्टिस (Disciplinary and Grievance Procedures)।
ACAS, मैनेजिंग परफॉर्मेंस गाइडलाइंस।
GOV.UK, कर्मचारियों को हटाना - क्षमता प्रक्रिया।
अस्वीकरण: यह लेख सामान्य जानकारी है, कोई कानूनी, वित्तीय या चिकित्सा सलाह नहीं है।
