अदालत के आदेश के बाद बच्चे द्वारा संपर्क से मना करना माता-पिता के लिए बेहद तनावपूर्ण होता है।
आप खुद को असहाय और आदेश के उल्लंघन को लेकर चिंतित महसूस कर सकते हैं।
इंग्लैंड और वेल्स में कानून साफ है:
बच्चे का कल्याण सर्वोपरि है, लेकिन माता-पिता से संपर्क बढ़ाने की उम्मीद की जाती है।
तो क्या होता है जब बच्चा साफ "ना" कह देता है?
क्या आप आदेश के उल्लंघन के जोखिम में हैं?
बच्चे के मना करने से आपको संपर्क आदेश के पालन से छूट नहीं मिलती।
अदालत उम्मीद करती है कि आप संपर्क बढ़ाने के लिए सभी उचित कदम उठाएं।
बिना सबूत के इंकार मान लेने पर आप दोषी पाए जा सकते हैं।
हालांकि, कानून मानता है कि कुछ स्थितियों में बच्चे की इच्छाओं को गंभीरता से लेना चाहिए।
खासकर जब वे बड़े हो रहे हों या सुरक्षा की कोई वास्तविक चिंता हो।
अदालत इनकार को गंभीरता से कब लेती है?
अदालत केवल इनकार की बात को नहीं, बल्कि उसके पीछे के कारणों को भी देखेगी।
मुख्य कारणों में शामिल हैं:
परिपक्व और सुसंगत विचार: अगर बच्चा बड़ा है और इनकार के स्पष्ट कारण बताता है, तो अदालत उसकी बात मान सकती है।
चिल्ड्रन एक्ट 1989 के तहत कोर्ट को बच्चे की उम्र और समझ के अनुसार उसकी इच्छाओं पर विचार करना होता है।पीड़ा या नुकसान के सबूत: यदि संपर्क से गंभीर मानसिक तनाव या नुकसान हो रहा है, तो कोर्ट इसकी जांच करेगा।
इसे स्कूल रिपोर्ट, डॉक्टर के पर्चे या विशेषज्ञों की राय से साबित किया जा सकता है।दबाव या सिखाने का अभाव: अदालत माता-पिता के प्रभाव को लेकर सतर्क रहती है।
यदि लगा कि बच्चे को सिखाया गया है या दबाव डाला गया है, तो इसे बेहद गंभीरता से लिया जाएगा।
आपकी चेकलिस्ट: आपको क्या करना चाहिए?
ऐसी स्थिति में आपको कोर्ट को दिखाना होगा कि आप जिम्मेदारी से काम कर रहे हैं।
यहाँ कुछ व्यावहारिक कदम दिए गए हैं:
बिना दबाव डाले संपर्क को बढ़ावा दें: बच्चे को मिलने के लिए प्यार से समझाएं, लेकिन डराएं या धमकाएं नहीं।
कोर्ट चाहती है कि आप दूसरे माता-पिता के प्रति सकारात्मक रवैया रखें।छोटी या सामान्य जगह पर मुलाकात का विकल्प दें: अगर बच्चा डरा हुआ है, तो कम समय की या किसी सामान्य जगह पर मुलाकात तय करें।
इससे भरोसा बहाल करने और तनाव कम करने में मदद मिल सकती.सभी प्रयासों को डायरी में दर्ज करें: संपर्क कराने के हर प्रयास का लिखित रिकॉर्ड रखें।
बातचीत, इनकार और अपनी प्रतिक्रियाएं नोट करें।
कोर्ट में दोबारा मामला जाने पर यह डायरी बहुत काम आएगी।जल्द से जल्द पेशेवर मदद लें: यदि इनकार बना रहता है, तो मध्यस्थ, पारिवारिक थेरेपिस्ट या चाइल्ड साइकोलॉजिस्ट की मदद लें।
इससे कारण जानने में मदद मिलेगी और कोर्ट में आपकी सक्रियता दिखेगी।
आम गलतियां और भ्रम
माता-पिता को डर रहता है कि बच्चे के इनकार के लिए उन्हें ही दोषी माना जाएगा।
लेकिन कोर्ट वास्तविक संकोच और माता-पिता की लापरवाही में अंतर समझती है।
इन गलतियों से बचें:
मान लेना कि आदेश अपने आप रद्द हो गया: केवल कोर्ट ही संपर्क आदेश को बदल या रोक सकती है।
बिना अदालती आदेश के संपर्क रोकना कार्रवाई को बुलावा देना है।बातचीत न करना: दूसरे माता-पिता को स्थिति की जानकारी देते रहें।
यदि संपर्क नहीं करा पा रहे हैं, तो कारण और अपने प्रयासों के बारे में बताएं।बदलाव के लिए अपील न करना: यदि लगातार इनकार वास्तविक है, तो संपर्क बंद करने के बजाय आदेश में सुधार के लिए कोर्ट में आवेदन करें।
क्या आप जानते थे?
यदि सच्चे प्रयासों के बाद भी बच्चा मना करता है, तो कोर्ट संपर्क आदेश बदल सकती है।
फोकस हमेशा बच्चे की भलाई पर होता है, माता-पिता को सजा देने पर नहीं।
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अस्वीकरण: यह ब्लॉग केवल शैक्षिक उद्देश्यों के लिए सामान्य जानकारी प्रदान करता है।
यह कानूनी सलाह नहीं है। नतीजे आपकी व्यक्तिगत परिस्थितियों के आधार पर भिन्न हो सकते हैं।
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