बच्चों की मदद या इनहेरिटेंस टैक्स कम करने के लिए घर उपहार में देना आसान लग सकता है। लेकिन यह इतना सरल नहीं होता।
इसमें कई टैक्स जाल और उलझनें हैं। एक अच्छा फैसला एक महंगी गलती बन सकता है।
प्रॉपर्टी ट्रांसफर से पहले IHT, GWR गिफ्ट ट्रैप और POAT नियमों को समझना जरूरी है।
मुख्य नियमों को समझना
एस्टेट प्लानिंग में 7 साल का नियम अहम है। घर गिफ्ट करने के बाद यदि आप 7 साल जीवित रहते हैं, तो मूल्य IHT से बाहर हो सकता है।
लेकिन यह तभी लागू होगा जब आप संपत्ति का पूरा अधिकार छोड़ दें।
बिना पूरा बाजार किराया दिए वहां रहने पर GWR नियम लागू होंगे। इससे घर को अभी भी आपके एस्टेट का हिस्सा माना जाएगा।
बाजार किराया देकर GWR से बचने पर भी आप पर POAT लागू हो सकता है। यह सालाना आयकर है जो गिफ्टेड प्रॉपर्टी में रहने पर लगता है।
आपके बच्चों को मिलने वाला किराया कर योग्य होगा। इस किराये की समीक्षा नियमित रूप से की जानी चाहिए।
यदि संपत्ति पर लोन है, तो ट्रांसफर करने पर लोन के हिस्से के आधार पर प्राप्तकर्ता को SDLT देना पड़ सकता है।
अक्सर लोग इसे भूल जाते हैं, जिससे अनपेक्षित टैक्स बिल आ सकता है।
व्यावहारिक विकल्प और रास्ते
यदि आप घर गिफ्ट कर वहीं रहना चाहते हैं, तो नए मालिकों को बाजार किराया देना होगा। यह एग्रीमेंट लिखित होना चाहिए।
इससे GWR से बचाव होगा, लेकिन POAT और इनकम टैक्स लागू होंगे। आपके बच्चों को किराये पर टैक्स देना होगा।
इन उलझनों के कारण अन्य विकल्प बेहतर हो सकते हैं।
जैसे, विल-बेस्ड लाइफ इंटरेस्ट ट्रस्ट बच्चों के हिस्से को सुरक्षित रखता है और पार्टनर को रहने की अनुमति देता है।
इसमें जोखिम कम हैं और HMRC द्वारा इसे चुनौती देने की संभावना भी कम है।

जोखिम समझाने के उदाहरण
बिना रेंट गिफ्ट: माता-पिता ₹5 करोड़ का घर उपहार में देते हैं पर बिना रेंट रहते हैं। GWR नियम लागू होने से प्रॉपर्टी एस्टेट का हिस्सा रहेगी।
रेंट के साथ गिफ्ट: माता-पिता घर गिफ्ट कर पूरा मार्केट रेंट देते हैं। GWR लागू नहीं होगा, पर बच्चों को रेंट इनकम पर टैक्स देना होगा।
आम गलतियां
लोग अक्सर संपत्ति उपहार में देने की जटिलता को कम आंकते हैं।
किराया न देना, दस्तावेज न बनाना या SDLT को नजरअंदाज करना भारी टैक्स बिल ला सकता है।
यह याद रखें कि GWR से बचने पर भी POAT नियम लागू हो सकता है।
मुख्य निष्कर्ष
घर गिफ्ट करना टैक्स बचाने का आसान रास्ता नहीं है।
कदम उठाने से पहले IHT, POAT और SDLT के प्रभावों की गणना करें।
लाइफ इंटरेस्ट ट्रस्ट जैसे अन्य विकल्पों पर विचार करें। इसमें जोखिम कम हैं। दस्तावेज व्यवस्थित रखें।
अस्वीकरण: यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है। यह कानूनी, वित्तीय या टैक्स सलाह नहीं है। हर मामला अलग होता है। नियमों को समझें और दस्तावेज अपडेट रखें।
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