यदि विदेशी तलाक के फैसले में आपको आपकी ज़रूरत या हक से कम मिला है, तो आपके विकल्प खत्म नहीं हुए हैं। वैवाहिक और पारिवारिक कार्यवाही अधिनियम 1984 (MFPA) का भाग III उन लोगों को एक विशेष रास्ता देता है जिन्होंने विदेश में तलाक लिया है लेकिन इंग्लैंड या वेल्स से उनका असली जुड़ाव है। यह माध्यम अंग्रेजी अदालतों को वित्तीय राहत देने की अनुमति देता है—वह भी विदेशी तलाक के बाद—यदि न्याय की मांग हो। लेकिन यह प्रक्रिया स्वचालित नहीं है, और अदालत कदम उठाने से पहले कड़े दो-चरणीय परीक्षण को लागू करती है।
गेटवे मानदंड: क्या आप आवेदन कर सकते हैं?
अदालत द्वारा आपके मामले पर विचार करने से पहले, आपको "गेटवे" मानदंडों को पूरा करना होगा। ये सख्त न्यायिक आवश्यकताएं हैं, और आपको केवल एक को पूरा करने की आवश्यकता है:
अधिवास (Domicile): आप इंग्लैंड या वेल्स के निवासी हैं, या तो अपने आवेदन के समय या जब विदेशी तलाक को अंतिम रूप दिया गया था।
सामान्य निवास (Habitual Residence): आप आमतौर पर इंग्लैंड या वेल्स में रह रहे हैं, या तो अभी या विदेशी तलाक के समय।
वैवाहिक घर (Matrimonial Home): विदेशी तलाक के समय वैवाहिक घर इंग्लैंड या वेल्स में था।
ये मानदंड यह सुनिश्चित करने के लिए हैं कि केवल इंग्लैंड या वेल्स से वास्तविक जुड़ाव रखने वाले ही यहां की अदालतों का उपयोग कर सकें। यदि आप इनमें से कम से कम एक संबंध नहीं दिखा सकते हैं, तो आपका आवेदन आगे नहीं बढ़ेगा।
ठोस आधार परीक्षण: क्या इंग्लैंड सही मंच है?
गेटवे पार करना तो बस शुरुआत है। इसके बाद अदालत को यह तय करना होगा कि क्या आदेश देने के लिए कोई "ठोस आधार" है। यह कोई औपचारिक मुहर लगाने जैसी प्रक्रिया नहीं है। प्रमुख मामला, एगबाजे बनाम एगबाजे [2010] UKSC 13, मुख्य कारकों को रेखांकित करता है:
इंग्लैंड और वेल्स से जुड़ाव: अदालत इस देश से आपके वर्तमान और पुराने संबंधों को देखेगी, जिसमें आपके रहने, काम करने और संपत्ति की जगह शामिल है।
विदेशों में राहत की उपलब्धता: यदि आप उस देश में उचित समझौता प्राप्त कर सकते थे जहाँ आपका तलाक हुआ था, तो अदालत हस्तक्षेप करने से बच सकती है।
निष्पक्षता: अदालत की मुख्य चिंता यह है कि क्या विदेशी समझौता निष्पक्ष था। यदि आपको कुछ नहीं मिला, या बहुत कम मिला, तो अंग्रेजी अदालत आपकी राशि को "बढ़ाने" के लिए कदम उठा सकती है।
सम्मान और अंतिमता (Comity and Finality): अदालत विदेशी फैसलों का सम्मान करती है और उन्हें आसानी से खारिज नहीं करेगी। इसका उद्देश्य दोबारा मौका देना नहीं, बल्कि वास्तविक अन्याय को दूर करना है।
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि अदालत विदेशी कार्यवाही को दोबारा शुरू नहीं करेगी। इसके बजाय, यह विचार करेगी कि परिस्थितियों के अनुसार अतिरिक्त वित्तीय राहत कितनी उपयुक्त है।
प्रक्रिया की संक्षेप जानकारी: यह कैसे काम करती है?
भाग III आवेदन की प्रक्रिया सामान्य वित्तीय राहत दावे से अलग है, लेकिन इसमें कुछ तत्त्व समान हैं:
अनुमति चरण (Permission Stage):
आपको सबसे पहले अपना दावा दायर करने की अनुमति के लिए आवेदन करना होगा। यह आमतौर पर "बिना नोटिस के" (इस चरण में दूसरे पक्ष को सूचित नहीं किया जाता है) किया जाता है। अदालत आपके सबूतों पर विचार करेगी और तय करेगी कि क्या आपका मामला आगे बढ़ाने लायक मजबूत है।पूरा आवेदन:
यदि अनुमति मिल जाती है, तो आप फॉर्म ए (Form A) का उपयोग करके पूरा आवेदन दर्ज करते हैं। इससे सामान्य वित्तीय राहत प्रक्रिया शुरू हो जाती है, जिसमें संपत्ति का खुलासा और बातचीत शामिल है।अदालत की सुनवाई:
मामला पहली निर्देश नियुक्ति (FDA) और वित्तीय विवाद समाधान (FDR) सुनवाई की ओर बढ़ेगा, ठीक वैसे ही जैसे घरेलू वित्तीय राहत मामले में होता है। अदालत समझौते को बढ़ावा देगी लेकिन सहमति न बनने पर आदेश दे सकती है।
सामान्य गलतियाँ और विवादास्पद बिंदु
देरी: इसकी कोई सख्त समय सीमा नहीं है, लेकिन बिना वजह की देरी आपके मामले को कमजोर कर सकती है। अदालत उम्मीद करती है कि आप विदेशी तलाक के बाद तुरंत कदम उठाएं।
दोहरा लाभ (Double Recovery): अदालत आपको जरूरत से ज्यादा आर्थिक लाभ पाने की अनुमति नहीं देगी, क्योंकि विदेश में मिले लाभ को भी ध्यान में रखा जाएगा।
खुलासा: दुनिया भर की संपत्तियों का पूर्ण और स्पष्ट खुलासा आवश्यक है। अदालत दोनों पक्षों के वित्त की जांच करेगी, जिसमें देश और विदेश की संपत्तियां एवं पेंशन शामिल हैं।
लागत: भाग III के आवेदन महंगे हो सकते हैं और इनमें जोखिम भी है। यदि आपका दावा कमजोर या असफल रहता है, तो अदालत आप पर हर्जाना लगा सकती है।
आंकड़ों की झलक
हाल के आंकड़े बताते हैं कि भाग III के लगभग 70% दावों में लंदन की संपत्ति या £1 मिलियन से अधिक की पेंशन शामिल होती है। यह महंगे वैश्विक तलाकों की प्रकृति और निष्पक्ष न्याय के लिए अंग्रेजी अदालतों के आकर्षण को दर्शाता है।
मुख्य केस कानून: एगबाजे बनाम एगबाजे [2010] UKSC 13
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला आज भी मुख्य मार्गदर्शक है। अदालत ने जोर दिया कि भाग III केवल मंच चुनने (forum shopping) का जरिया नहीं है, बल्कि वास्तविक अन्याय को दूर करने का एक साधन है। अंग्रेजी अदालत की भूमिका विदेशी फैसले को बदलने की नहीं, बल्कि उसकी कमियों को पूरा कर न्याय सुनिश्चित करने की है।
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अस्वीकरण: यह ब्लॉग पोस्ट केवल शैक्षिक उद्देश्यों के लिए सामान्य जानकारी प्रदान करता है। यह कोई कानूनी सलाह नहीं है। परिणाम आपकी व्यक्तिगत परिस्थितियों के आधार पर भिन्न हो सकते हैं।
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