कुछ लोगों के लिए तलाक के ज़रिए शादी ख़त्म करना भावनात्मक या सांस्कृतिक बोझ लाता है।
अमान्यकरण (nullity) एक अलग रास्ता दिखाता है।
यदि इसे मंज़ूर किया जाए, तो यह शादी को ऐसे मानता है जैसे कानूनी तौर पर इसका कोई अस्तित्व ही न था।
यह आपकी स्थिति को फिर से 'अविवाहित' कर देता है।
इसके बाद आप बिना "तलाकशुदा" के ठप्पे के दोबारा शादी कर सकते हैं।
हालांकि, अमान्यकरण के नियम बेहद सख्त हैं।
आम तौर पर लोग इसे तलाक की तरह आसानी से नहीं समझ पाते हैं।

शून्य और शून्यकरणीय विवाह: क्या अंतर है?

कानून शून्य (void) और शून्यकरणीय (voidable) शादियों में अंतर करता है।

  • शून्य शादियां (Void marriages) कानूनी तौर पर कभी मान्य नहीं होतीं। इसके मुख्य कारण हैं:

    • द्विविवाह (Bigamy): शादी के समय कोई एक पक्ष पहले से शादीशुदा था।

    • कम उम्र (Under-age): एक या दोनों पक्षों की उम्र 16 वर्ष से कम थी।

    • वर्जित श्रेणियां: आपसी करीबी रिश्ता होना (जैसे भाई-बहन या माता-पिता और बच्चा)।

    यदि शादी शून्य है, तो इसे शुरू से ही अमान्य माना जाता है। आपको किसी की गलती साबित करने की ज़रूरत नहीं है। बस यह दिखाना होगा कि शादी के समय कोई कानूनी रोक मौजूद थी।

  • शून्यकरणीय शादियां (Voidable marriages) तब तक मान्य रहती हैं जब तक कोर्ट आदेश न दे। इनके आधार हैं:

    • सहवास न होना: शादी के बाद शारीरिक संबंध न बनना (केवल विपरीत लिंगी विवाह के लिए)।

    • ज़बरदस्ती (Duress): शादी के लिए किसी एक पक्ष को डराया या मजबूर किया गया था।

    • मानसिक अक्षमता: एक पक्ष शादी की प्रकृति को समझने में असमर्थ था।

    • यौन रोग छिपाना: शादी के समय किसी एक पक्ष ने जानबूझकर कोई यौन रोग (STD) छिपाया हो।

    शून्यकरणीय विवाह के मामलों में, कोर्ट द्वारा अमान्यता का आदेश देने तक शादी को मान्य माना जाता है।

अमान्यकरण के लिए आवेदन कैसे करें

यह प्रक्रिया तलाक के समान ही है लेकिन इसमें कुछ मुख्य अंतर हैं:

  1. अमान्यता आवेदन (फॉर्म D8N) दर्ज करें:
    आपको यह फॉर्म फैमिली कोर्ट में जमा करना होगा, जिसमें अमान्यकरण के आधार बताने होंगे।
    यह आवेदन शादी के तीन साल के भीतर किया जाना चाहिए।
    असाधारण मामलों में कोर्ट अधिक समय दे सकता है, जैसे कि यदि तथ्यों का पता हाल ही में चला हो।

  2. आवेदन की तामील कराना:
    यह आवेदन 28 दिनों के भीतर आपके जीवनसाथी को भेजा जाना चाहिए।
    यह समय-सीमा बेहद सख्त है।
    सही ढंग से तामील न होने पर आपके मामले में देरी हो सकती है या वह खारिज हो सकता है।

  3. सशर्त आदेश (Conditional Order) के लिए आवेदन:
    यदि आपका जीवनसाथी आवेदन का विरोध नहीं करता है, तो आप सशर्त आदेश के लिए अप्लाई कर सकते हैं।
    यदि कोर्ट आपके सबूतों से संतुष्ट है, तो वह यह आदेश जारी कर देगा।

  4. अंतिम आदेश (Final Order) के लिए आवेदन:
    एक संक्षिप्त प्रतीक्षा अवधि के बाद, आप अंतिम आदेश के लिए आवेदन कर सकते हैं।
    इसके बाद ही शादी को आधिकारिक तौर पर अमान्य घोषित किया जाता है।

सबूत: कोर्ट को क्या चाहिए

कोर्ट आपके आवेदन के समर्थन में स्पष्ट और विश्वसनीय सबूतों की मांग करेगा। इसमें शामिल हो सकते हैं:

  • शादी का प्रमाण पत्र और उम्र का प्रमाण।

  • पिछली शादियों या सिविल पार्टनरशिप का प्रमाण (द्विविवाह के मामले में)।

  • मेडिकल या मनोवैज्ञानिक रिपोर्ट (अक्षमता या बीमारी छिपाने के मामले में)।

  • गवाहों के बयान या पत्र-व्यवहार (दबाव या सहवास न होने के मामले में)।

Explainer card for Annulment vs Divorce: Who Qualifies for a Decree of Nullity?: Money issue, Evidence, Settlement.

यदि आपका जीवनसाथी आवेदन का विरोध करता है, तो कोर्ट सुनवाई और आगे के सबूतों की मांग कर सकता है।

वित्तीय दावे: आपके अधिकार क्या हैं?

अमान्यकरण आपको वित्तीय सुरक्षा से वंचित नहीं करता है। आप तलाक की तरह ही वित्तीय आदेशों के लिए आवेदन कर सकते हैं, जैसे:

  • एकमुश्त राशि का भुगतान (Lump sum payments)

  • संपत्ति समायोजन आदेश (Property adjustment orders)

  • जीवनसाथी का भरण-पोषण (Spousal maintenance)

  • पेंशन शेयरिंग आदेश (Pension sharing orders)

कोर्ट इसमें भी तलाक जैसे कारकों पर विचार करेगा, जैसे शादी की अवधि, योगदान और ज़रूरतें।
हालांकि, यदि शादी शून्य घोषित की जाती है, तो कोर्ट इस बात को ध्यान में रख सकता है कि कानूनी संबंध कभी था ही नहीं।

केस नोट: A बनाम B [2022] EWFC 1

इस मामले में, कोर्ट ने द्विविवाह के कारण शादी को शून्य घोषित कर दिया।
पता चला था कि एक पक्ष की शादी ऑस्ट्रेलिया में पहले ही हो चुकी थी।
यह फैसला पूरी जानकारी देने के महत्व को और नियमों के उल्लंघन पर कोर्ट द्वारा शादी अमान्य करने की तत्परता को दिखाता है।

आम गलतियां और विवादित बिंदु

  • समय-सीमा: आवेदन आम तौर पर तीन साल के भीतर किए जाने चाहिए। देरी आपके केस को कमज़ोर कर सकती है।

  • सबूत: अमान्यकरण का आधार साबित करने की ज़िम्मेदारी आपकी है। बिना सबूत के दावों के सफल होने की उम्मीद कम होती है।

  • सहवास न होना: यह आधार समलैंगिक विवाहों या सिविल पार्टनरशिप पर लागू नहीं होता है।

  • वित्तीय दावे: यदि आपको वित्तीय सहायता चाहिए, तो अंतिम आदेश जारी होने से पहले ही वित्तीय आदेशों के लिए आवेदन कर दें।

व्यावहारिक मदद: Caira का सहयोग

अमान्यता का आवेदन तैयार करना कठिन लग सकता है, विशेषकर तब जब आप खुद अपना पक्ष रख रहे हों। Caira फॉर्म D8N और मामले का विवरण तैयार करने में आपकी मदद कर सकती है, ताकि आपका आवेदन स्पष्ट और कोर्ट के लिए तैयार रहे।

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अस्वीकरण: यह ब्लॉग पोस्ट केवल शैक्षिक उद्देश्यों के लिए सामान्य जानकारी प्रदान करता है। यह कानूनी सलाह नहीं है। आपकी व्यक्तिगत परिस्थितियों के आधार पर परिणाम भिन्न हो सकते हैं।

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